The Best Of Karma Puja 2021 In Garukurha

 karma Puja 2021 :भाई-बहनों के स्नेह का प्रतीक करमा पर्व की ये है परंपरा, विवाहित बहनें मायके में करती हैं पूजा

करमा पर्व भारत के झारखंड, Garukurha में मनाया जाता है. करमा पर्व 1 दिनों तक चलता रहता है. इस पर्व की शुरुआत तीज पर्व के संपन्न होने के बाद शुरू हो जाती है. तीज का डाला अहले सुबह नदियों व तालाबों में विसर्जन किया जाता है 

karma Puja 2021, हजारीबाग न्यूज (संजय सागर) : करमा पर्व भाई-बहन के सद्भाव, स्नेह और प्रेम का प्रतीक है. यह पर्व भाद्रपद शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि को मनाया जाता है. इस पर्व का इंतजार कुंवारी व विवाहित बहनें बेसब्री से करती हैं. विवाहित बहनों को भी करमा पर्व का इंतजार रहता है क्योंकि विवाहित बहनें कर्मा की पूजा करने के लिए अपनी ससुराल से 1 सप्ताह पहले ही मायके पहुंचती हैं और करमा पूजा की तैयारी में जुट जाती हैं. करमा के लोकगीतों में भाई-बहनों के स्नेह, प्यार, खुशी, दर्द व पीड़ा झलकती है.

इस दौरान ये गीत गाया जाता है.

करम के जाड़ तक बुनली जावा रे

ओरे सखी सब जावा देलथिन खिंदाय रे.

घोड़वा चढ़िएले एलथिन भइया राजीव रे...

मत कांदो मत खींजो बहिन फुल कुमारी रे

ओरे सखी फिर जावा होतउ हदबुद रे...

इस गीत में भाई-बहन के बीच पौधा को लेकर दर्द व पीड़ा झलकती है. अपने भाइयों की सुरक्षा प्रदान करने के लिए बहनें विभिन्न तरह का बीज बोती हैं. अचानक जानवर द्वारा पौधों को नुकसान पहुंचा दिया जाता है. जिससे बहनों को पीड़ा होती है. जिसे देखकर भाई भी अपनी बहन को सांत्वना देते हैं और भाई संकल्प लेता है बहन की खुशियों को लौटाएगा. भाई बहनों को सांत्वना देते हुए कहता है कि मत रो बहना, तेरी हर खुशी के लिये फसल उगाएंगे. फिर से लहरा उठेंगे तेरी फसलें.

करम के लिए डाले में स्थापित किए गए बीजों को जावा कहा जाता है. इस दौरान से 7 दिनों तक सुबह शाम बहनें जावा जोगाती हैं अर्थात जावा को पूजा अर्चना कर वे लोकगीत के साथ गाती व झूमती हैं.

जावा को जगाने वाला गीत-

गोड़ा-तोरा लागो हियो, भुवां धरती मइया हो

हमर जावा है माइयेन रखिया हो...

(इस गाने में जावा को सुरक्षित करने के लिए धरती माता के लिए गीत गाए जाते हैं और धरती माता खुश होकर फसल को हरा भरा कर देती हैं. इस गाने से यह संदेश मिलता है कि धरती माता का पूजा करने से हर वर्ष फसलों का उत्पादन अधिक होता है. धरती माता की पूजा करने से क्षेत्र में अनाजों व फल सब्जियों का अधिक से अधिक उत्पादन होता है.)



करम के डाला को जगाने के लिए भाई बहनों से संबंधित दर्जनों गीत हैं. उन गीतों में से कुछ गीत इस प्रकार हैं...

गइया के घंटिए बाजे रे रुनुझुनूं बांसिइये बजावे रे भैया...

मच्छीये बैठेलय तोहें भाई रे संजईया भइया ...

इस गीत में बहनें भाइयों लिए कामना करती हैं कि हमारे भाइयों पर मक्खी कभी न बैठे. जिस तरह से गायों के गले में घंटी बजने से खुशियां झलकती हैं,उसी तरह हमारे भाई भी वंशी बजाकर खुशी से रहें. इस तरह के गीत और नृत्य 7 दिनों तक चलते रहते हैं. इस दौरान बहनें नदियों में जाकर स्नान करती हैं. नदी जाने के दौरान के गीत...

बहल आवे नदी नाला ,बहल आवे कांटा कुशा, बहल आवा हो देव, हमारी बहनियां...

देबउ हो गंगा मइया दुध के ढकनियां में

ऊपर करा हमरो बहिनिया के,

छान दिया हो गंगा मइया हमर बहिनियां के

विवाहित बहनें ससुराल से नहीं आ पाती हैं. उस दौरान भाई नदी के किनारे गंगा मैया से कहता है कि नदी में हर तरह का कांटा,कुश बह कर आ रहा है, लेकिन मेरी प्यारी बहन नहीं आ रही है. अगर नदी के सहारे मेरी बहन आती होगी, तो हे गंगा मां मेरी बहन को छानकर मुझ से मिलवा दो...

सप्ताह के छठे दिन बहनें निर्जला उपवास करती हैं. उस दिन जावा को रातभर जगाया जाता है.

लाले लाले धेजा हो परलन ओहार रे करम चईली आईले, करम चली आईले.

बड़का भइया आईले लेनिहारे

करम चली आईले

झगड़ू-झगड़ू सासु देहे बिदाई

करम चली आईले, करम चली आईले...


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